राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की सांसद Supriya Sule ने लोकसभा में Right to Disconnect Bill पेश कर देश में कामकाजी लोगों के बीच चर्चा का नया विषय खड़ा कर दिया। इस बिल का उद्देश्य कर्मचारियों को नौकरी के घंटों के बाद फोन कॉल, ईमेल और ऑफिस मैसेज से राहत दिलाना है।
कर्मचारियों पर बढ़ते डिजिटल दबाव को लेकर चिंता

Supriya Sule ने सदन में कहा कि डिजिटल युग में निरंतर उपलब्ध रहने का दबाव कर्मचारियों की मानसिक सेहत, सामाजिक जीवन और उत्पादकता पर नकारात्मक असर डाल रहा है। उन्होंने बताया कि कई देशों में पहले से ऐसे कानून लागू हैं, इसलिए भारत को भी इस दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए।
कंपनियों के लिए निर्धारित होंगे स्पष्ट नियम

Right to Disconnect Bill के अनुसार, कंपनियों को अपने कर्मचारियों के लिए ‘ऑफ-ड्यूटी’ समय तय करना होगा। इस दौरान कर्मचारी कार्य-संबंधी ईमेल या कॉल का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं होंगे। इससे कर्मचारियों को आराम, परिवार के साथ समय और मानसिक शांति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
कॉर्पोरेट जगत और कर्मचारियों में मिली-जुली प्रतिक्रिया
𝐍𝐨 𝐜𝐚𝐥𝐥𝐬, 𝐞𝐦𝐚𝐢𝐥𝐬 𝐚𝐟𝐭𝐞𝐫 𝐰𝐨𝐫𝐤: 𝐑𝐢𝐠𝐡𝐭 𝐭𝐨 𝐃𝐢𝐬𝐜𝐨𝐧𝐧𝐞𝐜𝐭 𝐁𝐢𝐥𝐥 𝐢𝐧𝐭𝐫𝐨𝐝𝐮𝐜𝐞𝐝 𝐢𝐧 𝐋𝐨𝐤 𝐒𝐚𝐛𝐡𝐚
— IndiaToday (@IndiaToday) December 6, 2025
The bill proposes granting every employee the right to disconnect from work-related calls and emails beyond official work hours and on… pic.twitter.com/bY4iCeXJtY
Right to Disconnect Bill को कर्मचारियों संगठनों ने सकारात्मक बताया, जबकि कुछ उद्योग संगठनों ने कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में लचीलापन जरूरी है। इसके बावजूद बहस का केंद्र यही रहा कि स्वस्थ कार्य संस्कृति को बढ़ावा देना अब भारत में समय की मांग है।









