प्रसिद्ध पर्यावरणविद और नवप्रवर्तनक Sonam Wangchuk ने लद्दाख में 15 दिन की भूख हड़ताल शुरू की। उनका उद्देश्य लद्दाख को राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करवाना था। यह आंदोलन 10 सितंबर से शुरू हुआ और लद्दाख की राजनीतिक स्थिति को लेकर स्थानीय युवाओं में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास था।
शांतिपूर्ण आंदोलन से हिंसा की ओर

शुरुआत में आंदोलन शांतिपूर्ण था, लेकिन 24 सितंबर को प्रदर्शन हिंसक रूप ले लिया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, जिसमें कम से कम 4 लोगों की मौत और 40 से अधिक लोग घायल हुए। स्थिति बिगड़ने के कारण लेह में कर्फ्यू लागू कर दिया गया।
सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल समाप्त की

हिंसा के बढ़ते खतरे को देखते हुए Sonam Wangchuk ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। उन्होंने युवाओं से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि लद्दाख की मांगों को संवाद और समझौते के माध्यम से हल करना चाहिए।
केंद्र सरकार और स्थानीय नेताओं के बीच विवाद
RUMOURS OF MY ARREST …
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) August 10, 2025
might not be as exagerated as those of Mark Twain's death.
Going to Kargil to join the KDA Apex protest & hunger strike,
to tell the world that…
ALL IS NOT WELL IN LADAKH.
I see jail as yet another step in the footsteps of dear Bapu.
Stay tuned &… pic.twitter.com/f19zdO2edj
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आरोप लगाया कि Sonam Wangchuk के प्रवचन और बयान आंदोलन में हिंसा को बढ़ावा देने वाले थे। वहीं, वांगचुक और अन्य स्थानीय नेताओं का कहना है कि सरकार ने स्थानीय नेताओं से सही तरीके से बातचीत नहीं की, जिससे युवाओं में असंतोष और आंदोलन तेज हुआ।









