Saare Jahan Se Achha The Silent Guardians सीरीज़ आपको 1970 के दशक के भारत में ले जाती है, जब देश परमाणु शक्ति बनने की कोशिश में था, लेकिन रास्ता चुनौतियों से भरा था। यह सिर्फ एक थ्रिलर नहीं, बल्कि उन अनसुने नायकों की कहानी है जिन्होंने बिना किसी पहचान के देश की रक्षा की।

एक खतरनाक मिशन, सीमाओं के पार
शीत युद्ध का समय था। अमेरिका, रूस और चीन परमाणु हथियारों की दौड़ में आगे थे और भारत पीछे छूट रहा था। वैज्ञानिक होमी भाभा की मौत, 1971 का युद्ध और शिमला समझौता, इन सबने भारत को और मुश्किल में डाल दिया। ऐसे में रॉ के पहले प्रमुख आर.एन. कावो (रजत कपूर) एक सीक्रेट मिशन तैयार करते हैं। जासूस विष्णु शंकर (प्रतीक गांधी) को पड़ोसी देश की परमाणु योजना रोकने का जिम्मा मिलता है। लेकिन उसका सामना होता है आईएसआई प्रमुख मुर्तज़ा मलिक (सनी हिन्दुजा) से, जो उतना ही चालाक और खतरनाक है।

Saare Jahan Se Achha The Silent Guardians ,70 का दशक जैसे सामने हो
निर्देशक Sumit Purohit ने 1970 के दशक को बारीकी से जिंदा कर दिया है। उस दौर की लोकेशन, कपड़े, भाषा और माहौल सब कुछ असली लगता है। गुप्त बैठकों, कोड वर्ड्स और सीमापार के मिशन आपको लगातार थ्रिल का एहसास कराते हैं। बैकग्राउंड म्यूजिक और सिनेमैटोग्राफी भी कहानी को और प्रभावशाली बनाते हैं।

दमदार परफॉर्मेंस, जो याद रह जाए
प्रतीक गांधी का अभिनय असरदार है। सनी हिन्दुजा का किरदार मुर्तज़ा मलिक सीरीज़ की जान है उनका अंदाज़, उर्दू लहजा और स्क्रीन प्रेज़ेंस बेहतरीन है। तिलोतमा शोमे, क्रितिका कामरा, सुहैल नय्यर और अनुप सोनी ने भी अपनी भूमिकाओं में जान डाल दी है।
थ्रिल, इमोशन और देशभक्ति का सही मेल
Saare Jahan Se Achha The Silent Guardians आपको शुरू से अंत तक जोड़े रखती है। इसमें रोमांच है, इतिहास की सच्चाई है और देशभक्ति की भावना भी। अगर आपको जासूसी और असली घटनाओं पर बनी कहानियां पसंद हैं, तो यह सीरीज़ ज़रूर देखनी चाहिए।









