Road project transparency नागरिकों ने नितिन गडकरी से की नई पहल की अपील

Road project transparency
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

Road project transparency, भारत में हर साल हजारों लोगों की जान सड़क हादसों में चली जाती है, जिनमें से बड़ी संख्या गड्ढों (Potholes) के कारण होती है। 2023 में सड़क हादसों में लगभग 1.8 लाख लोगों की मौत दर्ज की गई, जिससे देशभर में गुस्सा और चिंता बढ़ गई है। इसी बीच नागरिकों ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से अपील की है कि वे एक “सड़क प्रोजेक्ट पारदर्शिता वेबसाइट” शुरू करें, जिससे जनता को सड़कों की स्थिति और मरम्मत की जानकारी मिल सके।

Road project transparency की मांग क्यों हुई ज़रूरी

Road project transparency

सड़क उपयोगकर्ताओं का कहना है कि अभी यह जानना मुश्किल होता है कि किसी सड़क का रखरखाव कौन करता है या मरम्मत कब हुई। इस वजह से शिकायतें अनसुनी रह जाती हैं। लोग चाहते हैं कि सरकार एक ऐसा Road project transparency वेब पोर्टल बनाए जहाँ:

  • सड़कों की रखरखाव स्थिति और गड्ढों की रिपोर्ट सार्वजनिक हों।
  • लोग अपनी शिकायतें ऑनलाइन दर्ज कर सकें और उनकी ट्रैकिंग स्थिति देख सकें।
  • प्रत्येक सड़क निर्माण परियोजना की लागत, ठेकेदार और समयसीमा पारदर्शी रूप से उपलब्ध हो।
    इससे जनता में जवाबदेही बढ़ेगी और सड़क गुणवत्ता पर वास्तविक निगरानी हो सकेगी।

मंत्री और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

Road project transparency

नितिन गडकरी ने कई बार कहा है कि भारत में सड़क हादसे अक्सर खराब डिजाइन और दोषपूर्ण निर्माण के कारण होते हैं। उन्होंने सुझाव दिया है कि जिन ठेकेदारों की लापरवाही से जानें जाती हैं, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल दंड से नहीं बल्कि डेटा-आधारित पारदर्शिता प्रणाली से ही स्थायी सुधार लाया जा सकता है।

आगे का रास्ता – नागरिकों और सरकार की साझा जिम्मेदारी

नागरिकों का मानना है कि अगर एक राष्ट्रीय Road project transparency बनाया जाए, तो भारत सड़क सुरक्षा में बड़ी छलांग लगा सकता है। इस पोर्टल पर गड्ढों की लोकेशन, मरम्मत की स्थिति, खर्च और दुर्घटना डेटा सार्वजनिक होना चाहिए। सरकार को चाहिए कि राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के साथ मिलकर इस पहल को जल्द शुरू करे। पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी से ही “गड्ढा मुक्त भारत” का सपना साकार हो सकता है।