हाल ही में जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी Ram Bhadrachary ने एक सभा में प्रेमानंद महाराज को लेकर विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा कि प्रेमानंद जी न तो विद्वान हैं और न ही कोई चमत्कारी संत, बल्कि वे ज्ञान के मामले में एक बच्चे की तरह हैं। यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बड़ा विवाद बन गया।
संस्कृत ज्ञान को लेकर खुली चुनौती

Ram Bhadrachary ने प्रेमानंद महाराज को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनमें क्षमता है, तो मेरे द्वारा बोले गए संस्कृत श्लोकों का अर्थ बताएं या एक शब्द संस्कृत में बोलकर दिखाएं। उन्होंने यह भी कहा कि लोकप्रियता कुछ समय की होती है, उसे चमत्कार मानना उचित नहीं है।
संत समाज की प्रतिक्रिया

Ram Bhadrachary के इस बयान पर संत समाज में भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। कई संतों ने इस टिप्पणी को अनुचित बताया और सुझाव दिया कि दोनों संत आपसी संवाद से इस विवाद को खत्म करें। भक्तों के बीच भी इस मुद्दे पर तीखी बहस जारी है, जहां कुछ लोग रामभद्राचार्य के ज्ञान का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ प्रेमानंद महाराज की भक्ति भावना की सराहना कर रहे हैं।
आगे की राह और उम्मीदें
'मैंने प्रेमानंद जी पर कोई अभद्र टिप्पणी नहीं की वह मेरे बेटे जैसे हैं…जब भी प्रेमानंद जी मुझे मिलने आएंगे उन्हें आशिर्वाद दूंगा': जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज#JagadguruRamBhadracharya #PremanandJi #SpiritualLeaders pic.twitter.com/CifCmJ76dR
— Dainik Jagran (@JagranNews) August 25, 2025
फिलहाल, इस विवाद पर दोनों पक्षों की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं आया है। भक्तों को उम्मीद है कि यह मामला शास्त्रार्थ या संवाद के जरिए शांतिपूर्वक सुलझाया जाएगा, ताकि भक्ति और ज्ञान दोनों की गरिमा बनी रहे और संत समाज में एकता का संदेश जाए।









