Naresh Meena राजस्थान के टोंक जिले के एक स्वतंत्र राजनीतिक नेता हैं। वह देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र से जुड़े हैं। हाल ही में उनका नाम सुर्खियों में तब आया जब उन्होंने उपचुनाव के दौरान एक प्रशासनिक अधिकारी के साथ विवाद किया। उनका राजनीतिक करियर और विवादित घटनाओं ने उन्हें मीडिया में प्रमुख स्थान दिलाया।
आमरण अनशन क्या है?

आमरण अनशन का मतलब है भूख हड़ताल। यह एक ऐसा विरोध प्रदर्शन है जिसमें व्यक्ति न्याय या मांगों के लिए खाना छोड़ देता है। Naresh Meena ने जयपुर में “झालावाड़ स्कूल हादसा” के पीड़ित परिवारों के लिए न्याय और मुआवजे की मांग को लेकर आमरण अनशन शुरू किया।
विवाद और घटनाक्रम

Naresh Meena के आमरण अनशन के दौरान एक विवादित घटना सामने आई। उनके समर्थक पेड़ की छाया में बैठे हुए थे और उनका आदेश मानने में देरी कर रहे थे। इस पर Meena ने अपने समर्थकों पर थप्पड़ और लातों का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कई बार बुलाया था, लेकिन उनकी आवाज़ पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
जनता और सरकार की प्रतिक्रिया
साथियों, आज अनशन का 11वां दिन है.!
— Naresh Meena (@NareshMeena__) September 22, 2025
लेकिन इस तानाशाह भाजपा सरकार के कानों पर जूं तक रेंग नहीं रह रही!
यह सरकार इतनी निरंकुश हो चुकी है कि गरीब बच्चे मरे इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, किसानों की फसल तबाह हो जाए, इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, नरेश जैसे युवा मर जाए इन्हें कोई फर्क… pic.twitter.com/kqzDIW5pFs
इस घटना के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया में चर्चा तेज हो गई। जनता ने Naresh Meena की कार्रवाई को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया दी। कुछ लोग उनके कदम को अनुचित मानते हैं, जबकि उनके समर्थक इसे दृढ़ता और न्याय की लड़ाई का हिस्सा बताते हैं। सरकार ने भी मामले पर नजर रखी और प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना जताई।









