छोटी तेंदुलकर Shafali Verma दुनिया को दिखाया कि लड़कियां भी क्रिकेट में धमाका कर सकती हैं : ICC WWC 2025

Shafali Verma
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Shafali Verma, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की धाकड़ ओपनर, आज अपनी तूफानी बल्लेबाज़ी के लिए जानी जाती हैं। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्हें समाज, आलोचना और तमाम चुनौतियों से गुजरना पड़ा। उनकी कहानी हर उस लड़की के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों के लिए लड़ रही है।

शुरुआती दिन: हरियाणा के छोटे से शहर से शुरुआत

Shafali Verma

Shafali Verma का जन्म हरियाणा में हुआ। उनके पिता खुद क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन वो सपना अधूरा रह गया। उन्होंने बेटी में वो ही जुनून देखा और बचपन से क्रिकेट सिखाना शुरू किया। लेकिन हरियाणा में लड़कियों का क्रिकेट खेलना आसान नहीं था। जब शफाली नेट्स पर खेलने जातीं, तो उन्हें मैदान से हटाने की कोशिश करते “ये लड़कियों की जगह नहीं है।” इसलिए, पिता ने शफाली के बाल छोटे कटवाए और उन्हें लड़के की तरह कपड़े पहनाकर अभ्यास कराया, ताकि वो लड़कों के साथ खेल सकें।

कठिन परिश्रम और कोचिंग में संघर्ष

Shafali Verma

Shafali Verma को ट्रेनिंग देने के लिए उनके पिता रोज़ 8–10 किलोमीटर दूर ले जाते थे। क्रिकेट किट खरीदने के लिए परिवार को कई बार आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कई बार मैदान में उन्हें कहा गया – “लड़कियां क्रिकेट नहीं खेल सकतीं।” लेकिन शफाली ने हर बार बल्ले से जवाब दिया। उनकी मेहनत रंग लाई जब उन्होंने 12 साल की उम्र में हरियाणा अंडर-19 टीम में जगह बनाई।

बड़ा ब्रेक: सचिन तेंदुलकर से प्रेरणा और इंटरनेशनल डेब्यू

Shafali Verma

Shafali Verma बचपन से ही सचिन तेंदुलकर की बहुत बड़ी फैन थीं। जब उन्होंने 2013 में सचिन को रोहतक में खेलते देखा, उसी दिन ठान लिया – “अब मुझे भी भारत के लिए खेलना है।” महज 15 साल की उम्र में 2019 में उन्होंने टीम इंडिया के लिए डेब्यू किया, और सिर्फ दो साल में वो भारत की सबसे तेज़ T20 सेंचुरी बनाने वाली बल्लेबाज़ बन गईं। उनकी स्ट्राइक रेट, एग्रेसिव स्टाइल और आत्मविश्वास ने उन्हें ‘छोटी तेंदुलकर’ का नाम दिलाया।

संघर्ष से सफलता तक

2020 टी20 वर्ल्ड कप में उन्होंने भारत को फाइनल तक पहुंचाया। फिर 2023 अंडर-19 वर्ल्ड कप में कप्तान बनकर भारत को पहली बार खिताब दिलाया।और 2025 वर्ल्ड कप में भी उन्होंने भारत की जीत में अहम योगदान दिया।