भारत का Model Tenancy Act: किरायेदारों को सुरक्षा, लेकिन कुछ ही राज्यों में लागू

Model Tenancy Act
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

भारत सरकार द्वारा लाया गया Model Tenancy Act किरायेदारों और मकान मालिकों के बीच संतुलन बनाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। हालांकि यह कानून कई सुरक्षा और पारदर्शिता प्रदान करता है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी चुनौती यही है कि इसे अभी केवल कुछ राज्यों ने ही अपनाया है।

Model Tenancy Act क्या है और क्यों बनाया गया?

Model Tenancy Act

Model Tenancy Act का उद्देश्य किराए के बाजार में

  • अनुबंधों को पारदर्शी बनाना,
  • किरायेदार–मालिक विवाद कम करना,
  • और बेदखली जैसी समस्याओं को कानूनी रूप से आसान बनाना है।

इस कानून के तहत किराया निर्धारण, जमा राशि, मरम्मत की जिम्मेदारी और बेदखली की प्रक्रिया सब स्पष्ट रूप से तय किए गए हैं, ताकि दोनों पक्षों का हित सुरक्षित रहे।

किरायेदारों के लिए क्या-क्या सुरक्षा प्रदान करता है?

Model Tenancy Act

Model Tenancy Act के लागू होने पर किरायेदारों को कई लाभ मिलते हैं—

  • बिना लिखित समझौते के मकान मालिक उन्हें बेदखल नहीं कर सकता।
  • सुरक्षा जमा (Security Deposit) पर स्पष्ट सीमा तय होती है।
  • मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन होता है।
  • किराया बढ़ाने के नियम पारदर्शी और पूर्व-सूचित होते हैं।

इन प्रावधानों से किरायेदारों को अनावश्यक दबाव, मनमाने किराया वृद्धि और अचानक बेदखली जैसी स्थितियों से राहत मिलती है।

लेकिन क्यों केवल कुछ ही राज्यों ने अपनाया है यह कानून?

कानून वैकल्पिक (optional) है, यानी केंद्र ने इसे सुझाया है, लागू करना राज्यों के हाथ में है।
कई राज्यों ने इसे संशोधन के साथ अपनाया है, जबकि कुछ अब भी पुराने किराया नियंत्रण कानूनों पर चलते हैं।
इसके प्रमुख कारण हैं—

  • पुराने किराया नियंत्रण कानूनों का मजबूत ढांचा
  • राज्यों की राजनीतिक और स्थानीय परिस्थितियाँ
  • नए कानून से किराया बाजार में तुरंत परिवर्तन का डर
  • मकान मालिक–किरायेदार संतुलन को लेकर चिंताएँ

इसी कारण देश के कई बड़े राज्यों में इस कानून का पूर्ण लाभ अभी जनता तक नहीं पहुँच पाया है।