De De Pyaar De 2 मूवी Review in हिंदी – जब रिश्तों की गुत्थी प्यार, हंसी और थोड़ी-सी जिद में उलझ जाती है

De De Pyaar De 2
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De De Pyaar De 2 फिल्म की कहानी ऐसी है, जो हर उस इंसान को छूकर जाती है जिसने कभी अपने रिश्ते को किसी और की नज़रों से जज होते देखा हो। Ashish और Ayesha का रिश्ता इस बार सिर्फ रोमांस तक सीमित नहीं है। यहां बात है परिवार की स्वीकृति, उम्र के फ़ासले के गुस्से, और उन अनकहे डर की जो रिश्तों को लड़खड़ाते हैं। उनकी दुनिया में प्यार है, लेकिन रास्ता बिल्कुल आसान नहीं।

De De Pyaar De 2

R. Madhavan – वो पिता जो भीतर से टूट जाते हैं

De De Pyaar De 2 में R माधवन का किरदार सिर्फ पिता का नहीं है, वह एक ऐसा इंसान है जो अपनी बेटी के फैसलों से डरता भी है, उसे बचाना भी चाहता है, और उम्र के अंतर को समझ न पाने की बेचैनी भी झेल रहा है। उनकी आंखों में खीझ है, लेकिन अंदर एक बाप का असली डर भी है, की “क्या मेरी बेटी सही कर रही है?” उनका यही रोल उनकी बेहतरीन परफोर्मेंस को दिखाता है। 

Rakul – Ayesha की मासूमियत में हिम्मत है

Ayesha इस बार पहले से कहीं ज़्यादा हिम्मत वाली दिखाई देती है। वह सिर्फ प्यार में नहीं पड़ी, बल्कि वह उस प्यार के लिए खड़ी होती है। वह अपने परिवार से लड़ती नहीं, बस उन्हें समझाती है कि प्यार उम्र से बड़ा होता है, समाज की परिभाषा से नहीं। रकुल के चेहरे पर चमक और खुशियों में मासूमियत हर सीन में इंसानियत महसूस होती है।

De De Pyaar De 2 में Ashish की खामोशी भी कहानी कहती है

Ashish इस बार इमोशन्स को दबाता नहीं, बल्कि समझता है। वह Ayesha को खोना नहीं चाहता, लेकिन उसके परिवार के डर को भी नज़रअंदाज नहीं कर सकता। कई जगहों पर उसकी चुप्पी बहुत कुछ बोलती है, जैसे वो कह रहा हो, “अगर दुनिया मेरे खिलाफ है, तो भी मैं इस रिश्ते को सच बनाना चाहता हूँ।” अजय mature है, और उनके चेहरे की vulnerability फिल्म को शानदार बनाती है।

De De Pyaar De 2

परिवार की उलझनें – हंसी में लिपटा कड़वा सच

De De Pyaar De 2 की सबसे खूबसूरत बात है कि यह रिश्तों के डर, ego और expectations को बहुत हल्के अंदाज़ में दिखाती है। कभी अचानक मज़ेदार हालात बन जाते हैं, तो कभी अनजाने में किसी की दिल की बात निकल जाती है। जैसे परिवार के भीतर की छोटी-बड़ी लड़ाइयों में आप खुद को देख लेते हैं।

कहानी कभी तेज़, कभी धीमी, लेकिन दिल से जुड़ी

हाँ, De De Pyaar De 2 के कुछ हिस्से धीरे चलते हैं। कभी लगता है कि इमोशन्स थोड़े ज़्यादा खिंच गए। लेकिन फिर कोई सीन ऐसा आता है जो आपको मुस्कुरा देता है या अंदर तक छू जाता है, और आप महसूस करते हैं कि यह कहानी दिल के अंदर से आयी है, सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं लिखी गयी।