Bhagat Singh Jayanti 2025 : शहीद-ए-आज़म को नमन

Bhagat Singh
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शहीद-ए-आज़म Bhagat Singh का जन्म 28 सितम्बर 1907 को पंजाब के लायलपुर ज़िले (अब पाकिस्तान) में हुआ था। बचपन से ही उनमें देशभक्ति और क्रांतिकारी विचार गहराई तक बसे हुए थे। जलियांवाला बाग नरसंहार ने उनके जीवन को बदल दिया और वे आज़ादी के आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़ गए।

स्वतंत्रता संग्राम में योगदान

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Bhagat Singh ने हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) की स्थापना में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने अंग्रेजों को जगाने के लिए दिल्ली असेंबली में बम फेंककर क्रांति का संदेश दिया। उनका उद्देश्य किसी को नुकसान पहुँचाना नहीं, बल्कि ब्रिटिश हुकूमत को चेतावनी देना था।

भगत सिंह की शहादत

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लाहौर षड्यंत्र केस में दोषी ठहराए जाने के बाद 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी गई। मात्र 23 वर्ष की आयु में उन्होंने हंसते-हंसते देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।

भगत सिंह जयंती का महत्व

हर साल 28 सितम्बर को Bhagat Singh जयंती पर पूरे देश में उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि असली देशभक्ति निस्वार्थ सेवा और बलिदान में छिपी होती है। उनका नारा इंक़लाब ज़िंदाबाद आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा है।