India new tax law में आयकर विभाग को डिजिटल माध्यमों तक पहुंचने के अधिक अधिकार दिए गए हैं। इस कानून के तहत अब जांच एजेंसियां केवल कागजी दस्तावेज़ ही नहीं, बल्कि डिजिटल डेटा की भी तलाशी ले सकती हैं। इसका उद्देश्य ऑनलाइन लेनदेन और डिजिटल संपत्तियों के जरिए होने वाली टैक्स चोरी पर लगाम लगाना बताया जा रहा है।
डिजिटल स्पेस में क्या-क्या शामिल होगा

India new tax law प्रावधानों के अनुसार “वर्चुअल डिजिटल स्पेस” की परिभाषा काफी व्यापक रखी गई है। इसमें ईमेल अकाउंट, सोशल मीडिया प्रोफाइल, क्लाउड स्टोरेज, ऑनलाइन बैंकिंग और निवेश से जुड़े प्लेटफॉर्म शामिल हो सकते हैं। जांच के दौरान यदि अधिकारी को संदेह होता है, तो वह इन डिजिटल माध्यमों से संबंधित जानकारी तक पहुंच बना सकता है।
India new tax law, गोपनीयता को लेकर क्यों उठ रहे सवाल

कानून विशेषज्ञों और डिजिटल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि India new tax law नागरिकों की निजता के अधिकार पर असर डाल सकती है। उनका मानना है कि निजी चैट, ईमेल या सोशल मीडिया डेटा तक सीधी पहुंच से व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर खतरा पैदा हो सकता है। साथ ही, बिना मजबूत निगरानी तंत्र के ऐसे अधिकारों का दुरुपयोग होने की आशंका भी जताई जा रही है।
सरकार का पक्ष और आगे की बहस
🚨 Starting April 1, 2026, the income tax department will have the authority to access social media, emails, and other digital spaces to curb tax evasion. pic.twitter.com/E2k1MVFi8L
— Indian Tech & Infra (@IndianTechGuide) December 22, 2025
सरकार का कहना है कि ये अधिकार केवल विशेष परिस्थितियों में और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही इस्तेमाल किए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार, आम करदाताओं को इससे घबराने की जरूरत नहीं है और यह कदम सिर्फ बड़े स्तर की टैक्स चोरी रोकने के लिए है। हालांकि, आने वाले समय में इस कानून पर अदालतों और समाज में व्यापक बहस होने की संभावना है।









