यूट्यूबर और सोशल कमेंटेटर Dhruv Rathee एक बार फिर अपने विडियो को लेकर चर्चा में हैं। इस बार वजह बनी है सुपरहिट हिंदी फिल्म ‘धुरंधर’ (Dhurandhar Movie), जिसे लेकर उन्होंने अपने नए वीडियो में काफी कुछ कहा है। Dhruv Rathee का कहना है कि यह फिल्म सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं, बल्कि एक Dangerous Propaganda को भी बढ़ावा देती है, जो आम दर्शकों के सोचने-समझने के तरीके को प्रभावित कर सकता है।

‘धुरंधर’ की कहानी पर उठे सवाल
Dhruv Rathee के अनुसार फिल्म में दिखाई गई कहानी और किरदारों को इस तरह पेश किया गया है कि Fact और Fiction के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है। उन्होंने दावा किया कि दर्शक यह समझ नहीं पाते कि कौन-सी बातें कल्पना हैं और कौन-सी वास्तविकता से प्रेरित। राठी ने इसे समाज के लिए खतरनाक बताया, खासकर तब जब सिनेमा का असर करोड़ों लोगों पर पड़ता है।
Villain Glorification पर कड़ी आपत्ति
अपने वीडियो में Dhruv Rathee ने खासतौर पर फिल्म के एक प्रमुख किरदार की ओर इशारा किया, जिसे एक अपराधी होने के बावजूद स्टाइल और हीरोइज़्म के साथ दिखाया गया है। उनका कहना है कि इस तरह की Violence Glorification युवाओं पर गलत असर डाल सकती है और अपराध को सामान्य बनाने का काम करती है।
Dhruv Rathee का Aditya Dhar पर निशाना
ध्रुव राठी ने फिल्म के निर्देशक Aditya Dhar को भी आड़े हाथों लिया। उनका कहना है कि जब बड़े फिल्ममेकर सामाजिक और राजनीतिक संदेशों को इस तरह फिल्मों में छिपाकर पेश करते हैं, तो यह आने वाले समय में इतिहास और सोच दोनों को प्रभावित कर सकता है। Dhruv Rathee ने चेतावनी दी कि ऐसी फिल्में लंबे समय में समाज के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती हैं।
Box Office Success के बावजूद बढ़ता विवाद
दिलचस्प बात यह है कि जिस फिल्म पर सवाल उठ रहे हैं, वही फिल्म Box Office Records तोड़ रही है। ‘धुरंधर’ ने कम समय में सैकड़ों करोड़ की कमाई कर ली है और 2025 की सबसे बड़ी Blockbuster Hindi Movie बन चुकी है। सफलता के बावजूद फिल्म अब कंटेंट और विचारधारा को लेकर बहस के केंद्र में आ गई है।
Social Media Reaction और जनता की राय
Dhruv Rathee के वीडियो के बाद Social Media Debate तेज हो गई है। कुछ लोग उनके समर्थन में खड़े नजर आए, तो वहीं कई यूजर्स ने इसे ओवरएनालिसिस बताते हुए उनकी आलोचना की। एक तरफ फिल्म की कमाई और लोकप्रियता है, दूसरी तरफ इसके मैसेज को लेकर गंभीर सवाल।
सिनेमा या संदेश?
‘धुरंधर’ अब सिर्फ एक एक्शन-ड्रामा फिल्म नहीं रह गई है, बल्कि यह Cinema vs Propaganda की बहस का हिस्सा बन चुकी है। यह विवाद इस सवाल को फिर से सामने लाता है कि क्या फिल्मों को सिर्फ मनोरंजन तक सीमित रहना चाहिए, या उन्हें सामाजिक-राजनीतिक संदेश देने की पूरी आज़ादी होनी चाहिए।









