Payal Gaming Viral Video Truth: AI Deepfake निकला वीडियो, पुलिस जांच में बड़ा खुलासा

Payal Gaming
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

देश की मशहूर Gaming Influencer Payal Gaming (पायल धारे) इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो को लेकर सुर्खियों में हैं। इंटरनेट पर तेजी से फैल रहे इस वीडियो को पायल से जोड़कर देखा जा रहा था, जिससे फैंस और यूजर्स के बीच भ्रम की स्थिति बन गई। हालांकि शुरुआती जांच में ही सामने आ गया कि इस वायरल कंटेंट का पायल गेमिंग से कोई सीधा संबंध नहीं है।

Payal Gaming

महाराष्ट्र साइबर पुलिस की एंट्री

Payal Gaming के मामले की गंभीरता को देखते हुए Maharashtra Cyber Police ने जांच शुरू की। पुलिस जांच में यह साफ किया गया कि वायरल वीडियो डिपफेक (Deepfake AI Technology) की मदद से बनाया गया है। यानी वीडियो में दिखने वाला चेहरा असली नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए किसी और के चेहरे को बदलकर पायल जैसा दिखाने की कोशिश की गई।

Payal Gaming की साफ प्रतिक्रिया

Payal Dhare ने इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वायरल वीडियो पूरी तरह फर्जी है और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने के इरादे से इसे फैलाया गया है। उन्होंने अपने फॉलोअर्स से अपील की कि वे किसी भी Fake Viral Video को बिना पुष्टि किए शेयर न करें और अफवाहों पर भरोसा न करें।

डिपफेक तकनीक बना रही है खतरा

यह मामला एक बार फिर बताता है कि AI Deepfake Videos किस तरह सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने का जरिया बन रहे हैं। किसी भी पब्लिक फिगर की पहचान का दुरुपयोग कर फेक कंटेंट बनाना न सिर्फ नैतिक रूप से गलत है, बल्कि यह एक Cyber Crime भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस तरह के मामलों में और इजाफा हो सकता है।

कानूनी कार्रवाई की तैयारी

महाराष्ट्र पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस वीडियो को बनाने और फैलाने वालों के खिलाफ IT Act और Cyber Law के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि किसी की डिजिटल पहचान से छेड़छाड़ करना गंभीर अपराध है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

सोशल मीडिया के कंटेंट से सावधान 

कुल मिलाकर यह साफ हो चुका है कि Payal Gaming Viral Video से जुड़ी खबरें भ्रामक हैं और पायल धारे का उस वीडियो से कोई लेना-देना नहीं है। यह मामला सोशल मीडिया यूजर्स के लिए एक सबक है कि वे किसी भी वायरल कंटेंट पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और हमेशा उसकी सच्चाई जांचें।