भारत सरकार द्वारा लाया गया Model Tenancy Act किरायेदारों और मकान मालिकों के बीच संतुलन बनाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। हालांकि यह कानून कई सुरक्षा और पारदर्शिता प्रदान करता है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी चुनौती यही है कि इसे अभी केवल कुछ राज्यों ने ही अपनाया है।
Model Tenancy Act क्या है और क्यों बनाया गया?

Model Tenancy Act का उद्देश्य किराए के बाजार में
- अनुबंधों को पारदर्शी बनाना,
- किरायेदार–मालिक विवाद कम करना,
- और बेदखली जैसी समस्याओं को कानूनी रूप से आसान बनाना है।
इस कानून के तहत किराया निर्धारण, जमा राशि, मरम्मत की जिम्मेदारी और बेदखली की प्रक्रिया सब स्पष्ट रूप से तय किए गए हैं, ताकि दोनों पक्षों का हित सुरक्षित रहे।
किरायेदारों के लिए क्या-क्या सुरक्षा प्रदान करता है?

Model Tenancy Act के लागू होने पर किरायेदारों को कई लाभ मिलते हैं—
- बिना लिखित समझौते के मकान मालिक उन्हें बेदखल नहीं कर सकता।
- सुरक्षा जमा (Security Deposit) पर स्पष्ट सीमा तय होती है।
- मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन होता है।
- किराया बढ़ाने के नियम पारदर्शी और पूर्व-सूचित होते हैं।
इन प्रावधानों से किरायेदारों को अनावश्यक दबाव, मनमाने किराया वृद्धि और अचानक बेदखली जैसी स्थितियों से राहत मिलती है।
लेकिन क्यों केवल कुछ ही राज्यों ने अपनाया है यह कानून?
I can't believe people are cheering this. These are all terrible laws that'll prevent landlords from renting out their housing units to the youth that need them the most.
— Rishi | ഋഷി | 🌐🗽🥥🔰🏙 (@RishiJoeSanu) December 5, 2025
The only solution to rental issues is to raise the supply of new housing stock. Everything else is eye wash. https://t.co/lS7tmUc8rM
कानून वैकल्पिक (optional) है, यानी केंद्र ने इसे सुझाया है, लागू करना राज्यों के हाथ में है।
कई राज्यों ने इसे संशोधन के साथ अपनाया है, जबकि कुछ अब भी पुराने किराया नियंत्रण कानूनों पर चलते हैं।
इसके प्रमुख कारण हैं—
- पुराने किराया नियंत्रण कानूनों का मजबूत ढांचा
- राज्यों की राजनीतिक और स्थानीय परिस्थितियाँ
- नए कानून से किराया बाजार में तुरंत परिवर्तन का डर
- मकान मालिक–किरायेदार संतुलन को लेकर चिंताएँ
इसी कारण देश के कई बड़े राज्यों में इस कानून का पूर्ण लाभ अभी जनता तक नहीं पहुँच पाया है।









