चश्मदीदों ने अदालत में Yasin Malik की पहचान की : 1990 IAF अटैक केस

Yasin Malik
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1990 में श्रीनगर के रावलपोरा में हुए भारतीय वायुसेना कर्मियों पर हमले के मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। अदालत में पेश हुए चश्मदीदों ने Yasin Malik को हमले में शामिल मुख्य शूटर के रूप में पहचान लिया है। यह घटना उस समय देशभर में सनसनी का कारण बनी थी, जिसमें चार IAF जवान शहीद हुए थे और कई घायल हुए थे।

गवाह ने बताया—“फेरन उठाकर मलिक ने निकाली बंदूक”

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अदालत में बयान दर्ज कराने पहुंचे एक महत्वपूर्ण गवाह, जो हमले के वक्त IAF में कॉर्पोरल थे, ने कहा कि हमलावरों के बीच मौजूद Yasin Malik ने अपना फेरन उठाकर बंदूक निकाली और वायुसेना कर्मियों पर फायरिंग शुरू कर दी। गवाह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मलिक को पहचानते हुए कहा कि वे इस हमले की योजना और क्रियान्वयन दोनों में शामिल थे।

अभियोजन पक्ष के लिए बड़ी जीत

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गवाह की यह पहचान अभियोजन पक्ष के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। 1990 में फाइल हुआ यह केस TADA कानून के तहत दर्ज किया गया था, लेकिन लंबे समय तक इसमें प्रगति नहीं हो सकी। अब गवाह के अहम बयान से केस को मजबूती मिली है और अदालत में मुकदमे की सुनवाई एक बार फिर तेज़ होने की उम्मीद बढ़ गई है।

Yasin Malik पहले से तिहाड़ जेल में, आगे क्या?

Yasin Malik इस समय अलगाववादी गतिविधियों और आतंकी मामलों में सजा काटते हुए तिहाड़ जेल में बंद हैं। अब IAF अटैक केस में चश्मदीदों द्वारा की गई पहचान उनकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ा सकती है। अदालत आने वाले दिनों में अन्य गवाहों के बयान दर्ज करेगी, जिसके बाद इस ऐतिहासिक मामले में आगे की दिशा साफ होगी।