इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने World Test Championship (WTC) के अगले चक्र में बड़ा परिवर्तन किया है। अब सभी 12 फुल मेंबर देश इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का हिस्सा बनेंगे। पहले केवल 9 टीमें ही इसमें भाग लेती थीं। यह फैसला जुलाई 2027 से शुरू होने वाले नए चक्र के लिए लागू होगा। ICC ने “दो डिवीजन मॉडल” (Two-Tier System) को खारिज करते हुए एक ही स्तर पर सभी टीमों को शामिल करने का निर्णय लिया है, जिससे टेस्ट क्रिकेट का दायरा और आकर्षण दोनों बढ़ेंगे।
दो-डिवीजन मॉडल क्यों हुआ रद्द – सभी देशों के लिए समान अवसर

ICC के भीतर दो डिवीजन में टीमों को बांटने का विचार था, लेकिन कई बोर्डों ने इसका विरोध किया। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने तर्क दिया कि रिलेगेशन (नीचे गिरने) से खेल की प्रतिष्ठा पर असर पड़ेगा। वहीं छोटे क्रिकेट देशों जैसे अफगानिस्तान, आयरलैंड और जिम्बाब्वे ने कहा कि उन्हें बड़े देशों के साथ खेलने का मौका मिलना चाहिए। इसलिए ICC ने सभी 12 टीमों को समान स्तर पर शामिल कर टेस्ट क्रिकेट को अधिक संतुलित और प्रतिस्पर्धी बनाने का निर्णय लिया।
ODI सुपर लीग की वापसी – फिर से बढ़ेगा वनडे का रोमांच

ICC ने यह भी पुष्टि की है कि ODI सुपर लीग को फिर से शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। यह लीग पहले 2020 से 2023 के बीच खेली गई थी और अब 2028 से फिर शुरू होगी। इस लीग का उद्देश्य हर वनडे सीरीज को महत्व देना है ताकि टीमों को विश्व कप क्वालिफिकेशन में स्पष्ट मार्ग मिल सके। इससे वनडे फॉर्मेट को दोबारा लोकप्रियता मिलेगी और दर्शकों को हर मैच में प्रतिस्पर्धा का मज़ा मिलेगा।
भारत और अन्य देशों के लिए World Test Championship का क्या होगा असर
🚨 12 TEAMS IN WTC FROM 2027 🚨
— Johns. (@CricCrazyJohns) November 11, 2025
– World Test Championship is likely to feature 12 full members from 2027 cycle. [Espn Cricinfo] pic.twitter.com/JNL7pARnwh
भारत के लिए यह बदलाव सकारात्मक माना जा रहा है क्योंकि टीम को हर चक्र में World Test Championship में निश्चित जगह मिलेगी। साथ ही, ODI सुपर लीग की वापसी से खिलाड़ियों को लगातार मैच अभ्यास और अंक तालिका की प्रतिस्पर्धा में बने रहने का मौका मिलेगा। अफगानिस्तान, जिम्बाब्वे और आयरलैंड जैसे देशों को भी बड़े मंच पर खेलने का अवसर मिलेगा, जिससे वैश्विक क्रिकेट और मजबूत होगा। यह फैसला आने वाले वर्षों में टेस्ट और वनडे दोनों प्रारूपों को नई ऊर्जा देने वाला साबित हो सकता है।









