IISc, Wipro और RVCE की Driverless Car ने रचा इतिहास, भारत की पहली स्वदेशी ड्राइवरलेस कार

Driverless Car
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भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), विप्रो (Wipro) और आरवी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (RVCE) ने मिलकर बेंगलुरु में देश की पहली स्वदेशी Driverless Car का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया है। यह प्रोटोटाइप भारतीय सड़कों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है, जहाँ ट्रैफिक की जटिलता, गड्ढे और अनियमित रास्ते आम बात हैं। इस प्रोजेक्ट को छह वर्षों की शोध यात्रा के बाद तैयार किया गया है।

‘WIRIN’ प्रोजेक्ट — भारतीय सड़कों के लिए बना इनोवेशन

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इस कार को WIRIN (Wipro-IISc Research and Innovation Network) नाम दिया गया है। इसका उद्देश्य ऐसा ड्राइवरलेस सिस्टम बनाना है जो भारतीय ट्रैफिक पैटर्न को समझ सके। इसमें उन्नत सेंसर, कैमरे, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है। WIRIN को इस तरह प्रशिक्षित किया गया है कि यह सड़कों पर चल रहे अन्य वाहनों, पैदल यात्रियों और जानवरों की गतिविधियों को पहचानकर तुरंत निर्णय ले सके।

शिक्षा और उद्योग का बेहतरीन सहयोग

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WIRIN Driverless Car प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें शिक्षा जगत और उद्योग जगत का उत्कृष्ट तालमेल देखने को मिला। IISc और RV College ने तकनीकी शोध और विकास में अहम भूमिका निभाई, जबकि Wipro ने इंजीनियरिंग, सॉफ्टवेयर और परीक्षण सुविधाएँ प्रदान कीं। यह सहयोग इस बात का उदाहरण है कि भारत में कैसे शिक्षा और उद्योग मिलकर भविष्य की स्मार्ट तकनीक तैयार कर सकते हैं।

भविष्य की दिशा — भारत के लिए स्मार्ट मोबिलिटी की नींव

WIRIN Driverless Car केवल एक प्रोटोटाइप नहीं बल्कि भारत की स्मार्ट मोबिलिटी क्रांति की शुरुआत है। यह पहल आने वाले वर्षों में स्वायत्त टैक्सी, सार्वजनिक परिवहन और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स के लिए मार्ग प्रशस्त कर सकती है। अगर यह तकनीक सफल रही, तो भारत जल्द ही दुनिया के उन देशों में शामिल हो जाएगा जहाँ स्वदेशी ऑटोनॉमस वाहन तकनीक विकसित की गई है।