Drip Pricing पर होगी कार्रवाई : भारत सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों को दी सख्त चेतावनी

Drip Pricing
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भारत के उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने देश की प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों को चेतावनी दी है कि वे ग्राहकों को गुमराह करने वाली Drip Pricing जैसी भ्रामक तकनीकें तुरंत बंद करें, वरना सख्त कार्रवाई की जाएगी। मंत्रालय के अधीन केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने कंपनियों को नोटिस जारी करते हुए कहा है कि सभी प्लेटफॉर्म अपने यूजर इंटरफेस की सेल्फ ऑडिट रिपोर्ट तीन महीनों में जमा करें।

क्या है Drip Pricing ? उपभोक्ताओं को कैसे होता है नुकसान

Drip Pricing

Drip Pricing वह प्रथा है जिसमें किसी प्रोडक्ट या सर्विस की प्रारंभिक कीमत कम दिखाई जाती है, लेकिन भुगतान के अंतिम चरण में छिपे हुए शुल्क (Hidden Charges) जैसे डिलीवरी फीस, हैंडलिंग चार्ज या प्लेटफॉर्म फीस जोड़ दी जाती है। ऐसी तकनीकें उपभोक्ता को वास्तविक कीमत से अनजान रखती हैं और उन्हें अनजाने में अधिक भुगतान करने के लिए प्रेरित करती हैं। सरकार ने इसे “अनुचित व्यापार व्यवहार” (Unfair Trade Practice) की श्रेणी में रखा है।

सरकार की सख्त कार्रवाई: 11 कंपनियों को जारी हुए नोटिस

Drip Pricing

सरकार ने अब तक 11 प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म, जिनमें कुछ ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी कंपनियां भी शामिल हैं, को नोटिस भेजे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ कंपनियों ने कैश-ऑन-डिलीवरी (COD) ऑर्डर्स पर अतिरिक्त शुल्क लगाया था, जिसे Drip Pricing का उदाहरण माना गया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई प्लेटफॉर्म अपने शुल्कों को पहले से पारदर्शी तरीके से नहीं दिखाता, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उपभोक्ताओं और कंपनियों के लिए बड़ा सबक

इस कदम से अब सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपने मूल्य निर्धारण (Pricing) में पूरी पारदर्शिता रखनी होगी। वहीं, उपभोक्ताओं को भी ऑनलाइन खरीदारी करते समय फाइनल पेमेंट पेज पर जोड़े गए शुल्कों पर नजर रखनी चाहिए। सरकार का यह कदम न केवल ऑनलाइन व्यापार में निष्पक्षता (Fairness) लाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि उपभोक्ताओं का विश्वास भी बढ़ाएगा।