India poverty rate 4.9% पर आई – अर्थशास्त्रियों की नई रिपोर्ट

India poverty rate
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India poverty rate कम होने की दिशा में बड़ी उपलब्धि सामने आई है। प्रसिद्ध अर्थशास्त्रियों एस. महेंद्र देव (S. Mahendra Dev) और के.एस. जेम्स (K.S. James) की नवीन रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में भारत की अत्यंत गरीबी दर घटकर सिर्फ 4.9% रह गई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि बीते दशक में भारत ने आर्थिक असमानता को कम करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। रिपोर्ट के अनुसार, 2011-12 में यह दर लगभग 29.5% थी, जो अब सिंगल डिजिट में आ गई है ।

GDP ग्रोथ और सरकारी योजनाओं का बड़ा योगदान

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रिपोर्ट में बताया गया है कि India poverty rate घटने के पीछे तेजी से बढ़ती GDP ग्रोथ, ग्रामीण आय में सुधार और सरकारी सामाजिक योजनाओं की अहम भूमिका रही।

  • भारत की अर्थव्यवस्था ने 2023-24 में लगभग 8-9% की वृद्धि दर्ज की, जिससे रोजगार और आय दोनों में सुधार हुआ।
  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, मनरेगा, और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) जैसी योजनाओं ने गरीब परिवारों को राहत दी।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी से आत्मनिर्भरता बढ़ी।
    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार बनी रही, तो भारत आने वाले वर्षों में “अत्यंत गरीबी मुक्त देश” बनने की दिशा में अग्रसर रहेगा।

India poverty rate अभी भी मौजूद हैं चुनौतियाँ और असमानताएँ

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हालांकि यह गिरावट ऐतिहासिक है, लेकिन कुछ अर्थशास्त्री इसे सावधानी से देखने की सलाह देते हैं।

  • ग्रामीण-शहरी असमानता अभी भी बरकरार है — शहरों में गरीबी तेजी से घटी है, पर ग्रामीण इलाकों में स्थिति अपेक्षाकृत धीमी है।
  • मल्टीडायमेंशनल गरीबी (बहुआयामी गरीबी) जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, और स्वच्छता में सुधार की आवश्यकता बनी हुई है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार, “गरीबी की रेखा के ठीक ऊपर” रह रहे लाखों लोग अभी भी आर्थिक झटकों से नीचे गिर सकते हैं।

इसलिए, स्थायी और समावेशी आर्थिक नीतियों की जरूरत है ताकि यह सुधार लंबे समय तक टिक सके।

India poverty rate भविष्य की दिशा – समावेशी विकास और सशक्तिकरण

India poverty rate कम करना अगला लक्ष्य है टिकाऊ और समान विकास।

  • ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देना,
  • शिक्षा और स्वास्थ्य पर अधिक निवेश करना,
  • और महिलाओं व युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देना — ये सभी अगले दशक में गरीबी मिटाने के प्रमुख कदम होंगे।

अर्थशास्त्री एस. महेंद्र देव के अनुसार, “भारत अब सिर्फ वृद्धि नहीं, बल्कि समावेशी और न्यायसंगत विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।” अगर नीति-निर्माण और जमीनी क्रियान्वयन में निरंतरता बनी रही, तो भारत आने वाले वर्षों में गरीबी उन्मूलन का वैश्विक उदाहरण बन सकता है।