Ladakh के लेह जिले में 24 सितंबर 2025 को statehood demand और constitutional safeguards की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। हिंसा में कम से कम 4 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हुए। यह विरोध तब शुरू हुआ जब दो बुजुर्ग hunger strikers (62 और 72 वर्ष) बेहोश होकर अस्पताल पहुंचे। इससे युवा और आम जनता में भारी आक्रोश फैल गया।
Ladakh protests के मुख्य कारण

Ladakh में यह हिंसक घटना कई वर्षों से चली आ रही political dissatisfaction और autonomy demands का परिणाम है:
- राजनीतिक नियंत्रण में कमी: 2019 में Article 370 हटने और लद्दाख को Union Territory बनाए जाने के बाद क्षेत्र में लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व कम हो गया।
- अनसुलझी मांगें: राज्य और केंद्र सरकार के बीच statehood और Sixth Schedule की बातचीत में ठहराव, जिससे स्थानीय लोग नाराज हैं।
- युवाओं की नाराजगी: लंबे समय तक शांतिपूर्ण विरोध से कोई नतीजा न मिलने के कारण युवा सक्रिय हुए।
- सांस्कृतिक और पर्यावरणीय चिंता: भूमि और संसाधनों की सुरक्षा तथा संस्कृति की रक्षा के लिए स्थानीय लोग चिंतित हैं।
प्रशासन और सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया

प्रशासन ने हिंसा को नियंत्रित करने के लिए curfew और Section 163 BNS के तहत पांच से अधिक लोगों की सभा पर रोक लगाई। पुलिस ने stone pelting और संपत्ति नुकसान रोकने के लिए tear gas और baton charge का इस्तेमाल किया। अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा बलों ने self-defense में कार्रवाई की।
Sonam Wangchuk और आगे की बातचीत
🚨 #BREAKING — 35-day protest ongoing, demanding dignity, ecology & rights.
— Nikhil Sharma (@EarthWarriorNik) September 24, 2025
Students clash with police in Leh as hunger strike enters Day 15.
“People are getting impatient. Things can go out of hand.”#SaveLadakh #SaveHimalayas #SupportRewilding 🧵👇 pic.twitter.com/aRGtl6JB2g
प्रमुख climate activist Sonam Wangchuk ने अपने hunger strike को खत्म किया और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। Leh Apex Body (LAB) और Kargil Democratic Alliance (KDA) प्रतिनिधियों के साथ केंद्र सरकार की बैठक 6 अक्टूबर 2025 को निर्धारित है। यह बैठक statehood और constitutional guarantees पर अंतिम बातचीत के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।









