दिल्ली हाईकोर्ट ने Umar Khalid , शरजील इमाम और अन्य सात आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। ये सभी 2020 दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश के मामले में आरोपी हैं। कोर्ट ने माना कि इस मामले में गंभीर आरोप और पर्याप्त सबूत मौजूद हैं, इसलिए जमानत देना उचित नहीं होगा।
Umar Khalid कोर्ट का तर्क और कानूनी पहलू

जस्टिस नवीन चावला और शालिंदर कौर की बेंच ने कहा कि लंबे समय से जेल में होना जमानत का आधार नहीं बन सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है, लेकिन हिंसा के साथ किया गया विरोध लोकतंत्र के खिलाफ है।
Umar Khalid पर UAPA के तहत गंभीर आरोप

इस मामले में आरोपियों पर यूएपीए (Unlawful Activities Prevention Act) जैसी कठोर धाराएं लगाई गई हैं। कोर्ट का कहना है कि इस स्तर पर सबूतों की गहन जांच संभव नहीं है, इसलिए फिलहाल जमानत देना न्यायिक प्रक्रिया के लिए सही नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट में अपील की तैयारी

Umar Khalid और अन्य आरोपी अब इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विरोध के अधिकार से जुड़ा हुआ है।









