Vote Adhikar Yatra भारत के लोकतंत्र में मतदान का अधिकार हर नागरिक की सबसे बड़ी ताकत है। लेकिन हाल के दिनों में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाने और “वोट चोरी” जैसे आरोपों ने देशभर में चिंता पैदा कर दी है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बिहार से Yatra की शुरुआत की। यह यात्रा न सिर्फ एक राजनीतिक अभियान है, बल्कि विपक्ष द्वारा लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए चलाया गया जनआंदोलन भी है।
Vote Adhikar Yatra क्या है

Vote Adhikar Yatra राहुल गांधी और विपक्षी दलों (INDIA गठबंधन) की एक पहल है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची में हो रही कथित गड़बड़ियों और वोट चोरी के खिलाफ आवाज उठाना है। यह यात्रा बिहार के सासाराम से शुरू होकर करीब 1,300 किलोमीटर की दूरी तय करती हुई 20 से ज्यादा जिलों में निकाली गई और इसका समापन पटना के गांधी मैदान में हुआ।
यात्रा के मुख्य उद्देश्य

मतदाता सूची से नाम काटे जाने के विरोध में जनजागरूकता फैलाना। जनता को यह संदेश देना कि “एक वोट भी लोकतंत्र की दिशा बदल सकता है।” विपक्षी एकता का प्रदर्शन और जनता से सीधा संवाद। युवाओं, छात्रों और नए मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित करना।
विपक्ष की भूमिका

इस यात्रा में सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD), वामपंथी दल (CPI, CPI(M), CPI-ML), वीआईपी पार्टी (VIP) और अन्य क्षेत्रीय दल भी शामिल हुए। विपक्ष ने इसे लोकतंत्र की रक्षा के लिए साझा संघर्ष बताया। विपक्ष का दावा है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर लाखों वोटरों के नाम सूची से हटाए गए, जो सीधे तौर पर लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। इसलिए Vote Adhikar Yatra सिर्फ कांग्रेस नहीं बल्कि पूरे विपक्ष का आंदोलन बन गई।
भाजपा और एनडीए की प्रतिक्रिया
जहाँ विपक्ष इस यात्रा को लोकतंत्र बचाने की पहल बता रहा है, वहीं भाजपा और एनडीए ने इसे महज “राजनीतिक ड्रामा” करार दिया। उनका कहना है कि यह यात्रा आगामी चुनावों से पहले जनता को भ्रमित करने की कोशिश है।









