Yogendra Yadav का सुप्रीम कोर्ट में बड़ा खुलासा: बिहार SIR प्रक्रिया पर उठे सवाल

Yogendra Yadav
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Yogendra Yadav समाजसेवी और राजनीतिक विश्लेषक ने सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने अदालत में दो ऐसे मतदाताओं को पेश किया, जिन्हें चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत “मृत” घोषित कर दिया गया था, जबकि वे पूरी तरह जीवित थे।

Yogendra Yadav
Yogendra Yadav अपने साथ एक महिला और एक पुरुष को लाए

Yogendra Yadav दो ‘मृत’ मतदाता निकले जिंदा

सुनवाई के दौरान Yogendra Yadav अपने साथ एक महिला और एक पुरुष को लाए, जिनके नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में मृतक के रूप में दर्ज थे। उन्होंने दावा किया कि यह उदाहरण बिहार में हो रही व्यापक मतदाता वंचना का प्रमाण है।

चुनाव आयोग ने कहा “ड्रामा”

चुनाव आयोग का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने इस कदम को “ड्रामा” बताते हुए कहा कि यदि किसी नाम में त्रुटि है तो इसे ऑनलाइन फॉर्म के जरिए सुधारा जा सकता है। Yogendra Yadav ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि SIR प्रक्रिया के दौरान अब तक 65 लाख नाम हटाए जा चुके हैं और यह आंकड़ा 1 करोड़ तक पहुंच सकता है। उन्होंने इसे “दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ा मतदाता वंचन अभियान” बताया।

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Yogendra Yadav अपने साथ एक महिला और एक पुरुष को लाए

महिलाओं पर ज्यादा असर

उनका कहना था कि हटाए गए नामों में महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक है – 31 लाख महिलाओं के नाम हटाए गए, जबकि पुरुषों के 25 लाख नाम लिस्ट से गायब हुए। यादव के मुताबिक, बिहार में मतदाता पात्रता दर 97% से गिरकर 88% पर आ गई है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंताजनक है।

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Yogendra Yadav अपने साथ एक महिला और एक पुरुष को लाए

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमल्य बगची की बेंच ने कहा कि यह “अनजानी त्रुटि” हो सकती है, जिसे सुधारा जा सकता है, लेकिन साथ ही यादव के आंकड़ों और विश्लेषण को भी सराहा।