120 Bahadur : Defence Theatres में पहली Pan-India Release वाली Film — एक ऐतिहासिक पहल

120 Bahadur
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भारत की बहादुरी को बड़े परदे पर दिखाने वाली फिल्म 120 Bahadur ने देश में एक नया रिकॉर्ड बनाया है। यह पहली फिल्म है जिसे PictureTime के mobile cinema network के जरिए पूरे भारत के defence theatres में विशेष रूप से रिलीज़ किया जा रहा है। यह कदम न सिर्फ तकनीकी नवाचार का उदाहरण है, बल्कि सेना और उनके परिवारों के लिए एक भावनात्मक सम्मान भी है। जो हमेशा से देश के प्रति अपनी सच्ची श्रद्धा से हमे प्रेरित करते हैं। 

120 Bahadur

120 Bahadur War Drama वाली फिल्म 

120 Bahadur एक पावरफुल war drama film है, जो Rezang La की ऐतिहासिक लड़ाई को दिखाने का काम करती है। फिल्म में 13 कुमाऊँ रेजिमेंट की चार्ली कंपनी के वीर सैनिकों के साहस, त्याग और अदम्य जज़्बे को दर्शाया गया है। कहानी भारतीय सेना के उस बलिदान को समर्पित है जिसने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।

Farhan Akhtar मुख्य किरदार में 

फिल्म में फरहान अख्तर एक साहसी सैन्य अधिकारी की भूमिका निभा रहे हैं। उनका किरदार courage, leadership और patriotism का प्रतीक है। उनका अभिनय फिल्म को भावनात्मक गहराई और वास्तविकता प्रदान करता है। जिससे यह फिल्म और भी जबरदस्त लगती है। 

Pan-India Release in Defence Theatres

यह फिल्म pan-India release के रूप में लगभग पूरे देश के 800+ defence theatres में प्रदर्शित की जा रही है। पहली बार कोई भारतीय फिल्म mobile cinema network technology का उपयोग करके इतने सैन्य क्षेत्रों में रिलीज़ की जा रही है। यह पहल दूरदराज क्षेत्रों तक फिल्म पहुँचाने का एक बेहतरीन तरीका है, जहाँ आमतौर पर सिनेमाघरों की पहुँच नहीं होती।

Mobile Cinema Network एक बेहतरीन टेक्नोलॉजी 

PictureTime की mobile cinema network technology ट्रकों पर आधारित डिजिटल थिएटर सेटअप का उपयोग करती है, जो कुछ घंटों में किसी भी स्थान पर हाई-क्वालिटी स्क्रीनिंग कर सकती है। इससे फिल्में उन सैनिकों तक भी पहुँच पाती हैं जो सीमाओं, कैंटोनमेंट्स और दूरस्थ रक्षा इलाकों में तैनात होते हैं। यह मॉडल भारतीय सिनेमा के लिए innovative distribution strategy का एक नया अध्याय है।

Emotional और Cultural Importance

यह पहल सैनिकों के साहस को सीधे उनके समुदाय तक पहुँचाती है। फिल्म की कहानी उन बहादुरों की है जिनके परिवार इसी नेटवर्क के हिस्से हैं। इस तरह की रिलीज़ सेना और सिनेमा के बीच एक भावनात्मक पुल का काम करती है। जिससे यह भारत के सैन्य इतिहास को नई पीढ़ी के सामने एक आधुनिक cinematic रूप में प्रस्तुत करती है।